Wednesday, July 8, 2026

लोक सेवा

 

लोकसेवा

चन्द्र गुप्त मौर्या के दीवान संत प्रवृति के व्यक्ति थे | अपना कामकाज करते हुए वह निजी तौर पर अनेक लोगों की मदद करते रहते थे | एक दिन उनके सहायक ने उन्हें बताया कि एक नवनियुक्त न्यायाधीश उनसे मिलना चाहते हैं | दीवान ने सत्कार पूर्वक न्यायाधीश को बुलाकर आदर पूर्वक बैठाया तथा नाश्ते वगैरह की औपचारिकता पूरी की | यह सब शिष्टाचार निबट जाने पर न्यायाधीश ने अपनी जेब से नोटों की एक गड्डी निकाली और दीवान साहब की तरफ बढाते हुए बोले, “ये दस हजार रूपये हैं | इन्हें लेकर आप मुझे ॠण मुक्त करने की कृपा करें |

दीवान ने अचंभित होकर पूछा, “मैं तो आज से पहले आपसे कभी मिला भी नहीं हूँ फिर मैनें आपको ॠण कब दिया ?

न्यायाधीश ने बताया, “मैं आपकी रियासत की एक विधवा का बेटा हूँ | मेरी पढाई के लिए उन्होंने आपसे कुछ ॠण लिया था | अपने अंतिम समय में उन्होंने मुझे कहा था कि जब मैं समर्थ हो जाऊं तो यह ॠण उतार दूं |

दीवान थोड़ी देर विचारों में मग्न होने के बाद बोले, “आपकी बात सत्य होगी परन्तु आपका इस तरह ॠण चुकाना मुझे वाजिब नहीं लगता |

इस बार न्यायाधीश ने हैरान होकर पूछा, “कैसे, श्री मान ? 

दीवान साहब ने बड़ी ही सद्भावना से जवाब दिया, “आप इन रूपयों को मुझे देने की बजाय इनमें कुछ और मिलाकर जरूरतमंद व्यक्तियों की मदद करें और साथ में उन्हें प्रेरित करें कि वे भी समर्थ होकर ऐसे लोकोपकारी कार्य को आगे बढ़ाएँ | लोकसेवा की ऐसी परम्परा को गति देकर ही आप ॠण मुक्त हो सकेंगे |

इसी प्रकार वैश्य वैभव चेरिटेबल ट्रस्ट जिन व्यक्तियों को आर्थिक सहायता प्रदान करता है उन्हें संकल्प लेना चाहिए कि भविष्य में जब भी वे आर्थिक स्थिति से सुदृड एवम समर्थ हो जाएँगे तो ‘दस पैसे समाज को’ के नारे का अनुशरण अवश्य करेंगे |  

चरण सिंह गुप्ता

मो. 09313984463

Tuesday, June 23, 2026

सहज पके सो मीठा होए

 

सहज पके सो मीठा होए

 

इस संसार में प्रत्येक जन्म लेने वाले प्राणी की उसके गर्भाशय में पड़ने से पैदा होने तक कुछ अवस्थाएं होती हैं जिन्हें पूरा करने के बाद ही वह इस संसार में अवतरित होने के बाद स्वथ्य जीवन व्यतीत करता है | परन्तु इन अवस्थाओं में अगर कोई व्यवधान आ जाए तो प्राणी के जीवन भर किसी न किसी रूप में नकारा हो जाने का डर लगा रहता है | 

एक तितली के जीवन की चार अवस्थाएं होती हैं अंडा, लार्वा, प्यूपा और पूर्ण तितली | हर अवस्था अपना एक खास महत्त्व रखती है तथा प्राणी के चहूँ विकास के लिए सहायक सिद्द होती है | एक बार एक संत बाग में अपना डेरा जमाए था | उसने देखा कि एक तितली अपने प्यूपा से बाहर निकलने के लिए जी जान से कोशिश कर रही थी | वह पस्त होकर थोड़ी देर के लिए शांत हो जाती थी परन्तु बाहर निकलने के लिए फिर प्रयत्न शुरू कर देती थी | संत से, अपने दयालु स्वभाव वश, तितली की यह दशा देखी नहीं गई | संत ने तितली की सहायता करने हेतू एक पैनी वस्तु लेकर प्यूपा का मुहं काटकर चौड़ा कर दिया जिससे तितली आसानी से बाहर निकल गई | संत अपना काम करके निश्चिन्त बैठ गया और तितली के उड़ जाने की प्रतीक्षा करने लगा | परन्तु यह क्या, तितली उड़ न सकी |

संत को घोर पश्चाताप हुआ जब उसे पता चला कि प्यूपा से बाहर निकलते वक्त जोर लगाने के कारण ही तितली के  पंखों की नसों में वह द्रव प्रवाहित होता है जो उसके पंखों में मजबूती भरता है तथा उसे उड़ने में समर्थ बनाता है |

वह तितली जीवन भर उड़ न सकी |

समाचार पत्रों के माध्यम से पता चलता है कि वर्त्तमान युग के पढ़े लिखे, बहुत से दम्पती अपने बच्चों के जन्म दिन को स्पेशल तथा यादगार बनाने हेतू, प्रसूति का समय न आने के बावजूद, तिथि जैसे १२-१२-१२, नव वर्ष, दीपावली और अपने जन्म दिन इत्यादि को आपरेशन करवा कर जन्म दिलाने की मंशा बना लेते हैं |

मैं संसार के प्रत्येक डाक्टर से निवेदन करता हूँ कि, अपने व्यवसाय की गरिमा को कायम रखते हुए, वे ऐसे सोचने वाले दम्पतियों को उचित सलाह देकर देश के आने वाले कर्णधारों के शरीर में जहर फैलने से बचाएं | अन्यथा नवजीवन किसी न किसी रूप में अपाहिज हो जाएगा और माँ बाप संत की तरह जीवन भर पश्चाताप ही करते रह जाएंगे |

धन्यवाद |

Sunday, May 17, 2026

कोयला और चंदन

 

 

कोयला और चंदन

 

हकीम लुकमान का पूरा जीवन जरूरतमंदों की सहायता के लिए समर्पित था। जब उनका अंतिम समय

नजदीक आया तो उन्होंने अपने बेटे को बुलाया और कहा- बेटा, मैंने अपना सारा जीवन दुनिया को

शिक्षा देने में गुजार दिया। अब अपने अंतिम समय में मैं तुम्हें कुछ जरूरी बातें बताना चाहता हूं। तुम

एक कोयला और चंदन का एक टुकड़ा उठा लाओ। बेटे को पहले तो यह अटपटा लगा लेकिन उसने

सोचा कि जब पिता का हुक्म है तो यह सब लाना ही होगा। उसने रसोई घर से कोयले का एक टुकड़ा

उठाया। संयोग से घर में चंदन की एक छोटी लकड़ी भी मिल गई। वह दोनों लेकर अपने पिता के पास

गया।

लुकमान बोले- अब इन दोनों चीजों को नीचे फेंक दो। बेटे ने दोनों चीजें नीचे फेंक दी और हाथ धोने

जाने लगा तो लुकमान बोले- ठहरो बेटा, जरा अपने हाथ तो दिखाओ। फिर वह उसका कोयले वाला

हाथ पकड़कर बोले-बेटा, देखा तुमने। कोयला पकड़ते ही हाथ काला हो गया। लेकिन उसे फेंक देने के

बाद भी तुम्हारे हाथ में कालिख लगी रह गई। गलत लोगों की संगति इसी तरह होती है। उनके साथ

रहने पर भी दुख होता है और उनके न रहने पर भी जीवन भर के लिए बदनामी साथ लग जाती है।

दूसरी ओर सज्जनों का संग इस चंदन की लड़की की तरह है जो साथ रहते हैं तो दुनिया भर का ज्ञान

मिलता है और उनका साथ छूटने पर भी उनके विचारों की महक जीवन भर साथ रहती है। इसलिए

हमेशा अच्छे लोगों की संगति में ही रहना। तुम्हारा जीवन सुखद रहेगा।