सहज पके सो मीठा होए
इस संसार में प्रत्येक जन्म लेने
वाले प्राणी की उसके गर्भाशय में पड़ने से पैदा होने तक कुछ अवस्थाएं होती हैं
जिन्हें पूरा करने के बाद ही वह इस संसार में अवतरित होने के बाद स्वथ्य जीवन
व्यतीत करता है | परन्तु इन अवस्थाओं में अगर कोई व्यवधान आ जाए तो प्राणी के जीवन भर
किसी न किसी रूप में नकारा हो जाने का डर लगा रहता है |
एक तितली के जीवन की चार अवस्थाएं
होती हैं अंडा, लार्वा, प्यूपा और पूर्ण तितली |
हर अवस्था अपना एक खास महत्त्व रखती
है तथा प्राणी के चहूँ विकास के लिए सहायक सिद्द होती है |
एक बार एक संत बाग में अपना डेरा
जमाए था | उसने
देखा कि एक तितली अपने प्यूपा से बाहर निकलने के लिए जी जान से कोशिश कर रही थी | वह पस्त होकर थोड़ी देर के लिए शांत
हो जाती थी परन्तु बाहर निकलने के लिए फिर प्रयत्न शुरू कर देती थी | संत से, अपने दयालु स्वभाव वश, तितली की यह दशा देखी नहीं गई | संत ने तितली की सहायता करने हेतू
एक पैनी वस्तु लेकर प्यूपा का मुहं काटकर चौड़ा कर दिया जिससे तितली आसानी से बाहर
निकल गई | संत अपना
काम करके निश्चिन्त बैठ गया और तितली के उड़ जाने की प्रतीक्षा करने लगा | परन्तु यह क्या, तितली उड़ न सकी |
संत को घोर पश्चाताप हुआ जब उसे पता
चला कि प्यूपा से बाहर निकलते वक्त जोर लगाने के कारण ही तितली के पंखों की नसों में वह द्रव प्रवाहित होता है जो
उसके पंखों में मजबूती भरता है तथा उसे उड़ने में समर्थ बनाता है |
वह तितली जीवन भर उड़ न सकी |
समाचार पत्रों के माध्यम से पता चलता
है कि वर्त्तमान युग के पढ़े लिखे, बहुत से दम्पती अपने बच्चों के जन्म दिन को
स्पेशल तथा यादगार बनाने हेतू, प्रसूति का समय न आने के बावजूद, तिथि जैसे १२-१२-१२, नव वर्ष, दीपावली और अपने जन्म दिन इत्यादि को
आपरेशन करवा कर जन्म दिलाने की मंशा बना लेते हैं |
मैं संसार के प्रत्येक डाक्टर से
निवेदन करता हूँ कि, अपने व्यवसाय की गरिमा को कायम रखते हुए, वे ऐसे सोचने वाले दम्पतियों को उचित
सलाह देकर देश के आने वाले कर्णधारों के शरीर में जहर फैलने से बचाएं | अन्यथा नवजीवन किसी न किसी रूप में
अपाहिज हो जाएगा और माँ बाप संत की तरह जीवन भर पश्चाताप ही करते रह जाएंगे |
धन्यवाद |
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