Monday, October 12, 2026

गल्त फहमी

 गल्त फहमी

20 नवम्बर 2024 को हमारी (चरण एव संतोष) के शादी की 56 वीं सालगिरह थी | बच्चों ने अपने अनुसार खाना-पीना किया तथा सभी खुशी – खुशी विदा हो गए | विदा होने का मतलब है कि सभी अपने-अपने मकान पर चले गए | हालांकि हमारा खाना बच्चों के यहाँ ही होता था परंतु सोना अलग-अलग अपने-अपने मकानों पर ही होता था | हंभई थके - हारे आराम से सो गए |

21 नवम्बर को प्रत्येक दिन की तरह हम बिस्तर से उठे | संतोष प्रात: 8 बजे की लगभग सुबह की चाय बनाने रसोई में घुसी ही थी कि अचानक चक्कर आने के कारण अपने को संभाल न सकी और मुंह के बल जमीन पर गिर पड़ी | उनके सिर के अगले हिस्से में चोट लगी | लगभग 5 ईनच कट जाने के कारण उनके सिर से खून बहने लगा |

मैंने जल्दी से उन्हें बैठाया तथा डिटोल का फ़ोहा उनके सिर पर रख दिया | इसके बाद अपनी लड़की प्रभा को फोन करके जल्दी से आने को कहा | वह हमारे दामाद श्री मनोज जी तथा अपने लड़के भावेश को लेकर शीघ्र या गई तथा हम संतोष को लेकर मनीपाल अस्पताल लेकर चले गए |

मेरा बड़ा लड़का प्रवीण तथा उसकी पत्नि चेतना सुबह 7.30 पर ही नौकरी पर चले जाते हैं | छोटा लड़का पवन थोड़ा दूर रहता है अत: आने में देरी कर सकता था इसलिए सबसे पहले अपनी लड़की को ही बुलाया था | प्रथम उपचार के बाद मेरे पत्नी को घर भेज दिया गया था |

घर आकार संतोष की तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ | उन्हें उठाते, बैठते तथा चलते हुए चक्कर आ रहे थे | 22 तारीख को उन्हे अस्पताल ले जाना पड़ा जहां उन्हें भर्ती कर लिया गया | चार दिनों बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी तो दे दी गई परंतु उनके सिर में चक्कर आने बंद नहीं हुए | साथ ही उनके बाएं हाथ में भयानक दर्द होने लगा | डाक्टर को दिखाने पर पता चला कि गिरने से सिर की चोट के साथ हाथ का अंदर का मांस भी फट गया था | इसके लिए उन्हें 14 दिनों की फिजियोथरपी कराने की सलाह दी गई |  

फिजियोथरपी प्रत्येक दिन शाम के 3.30 बजे करानी थी | इसके लिए मेरे पौत्र नयन को अस्पताल ले जाना पड़ता था क्योंकि वही था जो दिन में घर रहता था तथा रात को ड्यूटी पर जाता था | चार दिन तो वह अपनी दादी को समय पर अस्पताल ले गया परंतु पाँचवे दिन अस्पताल से मेरे पास फोन आया की आप फिजियोथरपी के लिए जल्दी आ जाओ अन्यथा एक एमरजेन्सी के कारण हम आपको समय नहीं दे पाएंगे | मैनें नयन को फोन पर जल्दी आने के लिए कहा परंतु जब वह 15-20 मिनट तक नहीं आया तो देर होते देख हम बाहर खड़े एक पीन पहिया स्कूटर द्वारा अस्पताल पहुँच गए तथा फिजियोथरपी कराने लगे |

अपनी आदत अनुसार, क्योंकि मिलिट्री में डाक्टर को दिखाने के दौरान अपना फोन बंद करना पड़ता था, अस्पताल में भी मैंने अपना फोन बंद कर दिया था | इस दौरान नयन ने मुझे चार-पाँच बार फोन किया होगा जिसे मैं रिसीव नाहें कर पाया था | जब अस्पताल का                                                                                                                के लड़के गर्व के फोन पर नयन का फोन आया | मैंने उससे बात की तो जवाब मिला की वह हमें लेने आ रहा है, हम वहीं रुक गए और उसके साथ ही घर आए | इसके बाद नयन पहले की तरह अपनी दादी जी को फिजियोथरपी के लिए प्रत्येक दिन ले जाता लाता रहा | इस बीच 6 जनवरी 2025 को अचानक पवन, अपने घर से, अपना सारा सामान लेकर, मेरे मकान (973) की ऊपरी मंजिल पर रहने के मकसद से आ गया | अभी तक शाम का खाना हम प्रवीण के यहाँ खाया करते थे | पवन का सारा सामान ऊपरी मंजिल पर बिखरा पड़ा था | मैंने यह सोचकर कि अंजू आज खाना कैसे बनाएगी, चेतना को बताया देता हूँ कि वे अपना सामान आज लेआए हैं अत: आज सबका खाना वह बना देगी |

मैंने फोन पर कहा, “चेतना आज अंजू आ गई है.. |”

मेरी पूरी बात सुने बिना ही चेतना ने कहा,”ठीक है पापा जी, अभी मैंने खाना चढ़ाया नहीं है | आज वह ही बना देगी |”

चेतना की बात सुनकर मैं असमंजस में पड़ गया तथा सोचने लगा कि क्या कहूँ | इसी देरी के कारण फोन कट गया | इसके बाद एक सप्ताह तक चेतना का कोई फोन नहीं आया कि पापा जी खाना मैं बना रही हूँ | आ जाना | मुझे यह अखर रहा था | इसलिए 12 तारीख को मैं प्रवीण के यहाँ गया तथा सीधा प्रश्न किया, “चेतना किस बात की नाराजगी है?”       

चेतना :- पापा जी आप ऐसा क्यों कह रहे हो ?

मैंने बताया, एक तो यह कि एक हफ्ते से तुमने एक बार भी मुझे खाने के लिए नहीं बुलाया | दूसरे जिस दिन पवन ने अपना सामान शिफ्ट किया था मैंने यह सोचकर तुम्हें फोन किया था कि अंजू को उस दिन खाना बनाने में समस्या रहेगी तो तुम उनसे कह दो कि सबका खाना तुम्हारे यहाँ बन जाएगा परंतु तुमने तो मेरी पूरी बात सुनने से पहले ही अपना फैसला सुना दिया था | लगता है तुम्हारे बीच कुछ सौहार्द पूर्ण वातावरण नहीं है |

लगा जैसे सौहार्द पूर्ण वातावरण की बात सुनते ही चेतना की दुखती रग जाग्रत हो गई तभी तो वह एकदम बिफर पड़ी और रोते -रोते काफी देर तक अपनी सास तथा अंजू के विपरीत न जाने क्या-क्या मन की भड़ास निकालती रही |

जैसे ही चेतना चुप हुई तभी प्रवीण ने कहा, “पापा जी आपने भी नयन के साथ ठीक व्यवहार नहीं किया |”

“क्या”

जिस दिन आप नयन के देरी से पहहोचने पर स्कूटर से अस्पताल चले गए थे तो उसने आपको चार-पाँच फोन किए परंतु आपने एक बार भी जवाब नहीं दिया परंतु जब गर्व ने किया तो आपने एकदम जवाब दे दिया |

प्रवीण की बात सुनकर पहले तो मुझे गुस्सा आया कि मुझ पर शक कर रहें हैं फिर हंसी आई कि कितने नया समझ हैं अत: उन्हें समझाया, “अपनी मिलिट्री की पुरानी आदत अनुसार मैं जब भी डाक्टर के पास जाता हूँ तो अपना फोन खामोश मोड पर डाल देता हूँ तथा काम होने के बाद ही उसे चालू करता हूँ | इसलिए उस दिन गर्व के फोन आने से पहले मेरा फोन खामोश मोड पर था | वैसे तुमने अच्छा ही किया कि अपने मन की दुविधा मेरे सामने बयान कर दी परंतु इतना जरूर कहूँगा कि परिवारों के बीच बिखराव का सबसे बड़ा  कारण अधिकतर आपसी गलत फहमी ही होती है अत: इसे कभी भी पालना नहीं चाहिए |                       


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