समाधान
मोहन के साथ पूजा (मोहन की पत्नी) की रातों की नींद हराम
हो गयी थी | बच्चे भी समझ नहीं पा रहे
थे कि इस का अंत कब तथा कैसे होगा | मोहन इस बारे में जितना चिंतन करता उतना ज्यादा फ़सा हुआ महसूस
करता | समाधान मिल नहीं पा रहा था |
मोहन के सारे रिश्तेदार मस्तानी को समझाकर हार
चुके थे |वह किसी की न सुनते हुए एक
ही रट लगाए थी कि वह देवेन्द्र के बिना नहीं रह सकती |इसलिए मोहन अब अकेला पड गया था परन्तु उसे विश्वास था कि वह
अपनी लडकी को इस दलदल से निकालने में अवश्य सफल होगा |
एक रात आँखे बंद किए इन्हीं विचारों में खोया वह सोचने लगा कि उससे भगवान् की आस्था
में क्या कमी रह गयी कि मुरली वाले बाबा ने मुझे इतनी बड़ी दुविधा में डाल दिया | मैं तो बचपन से ही गोवर्धन को अपना पूज्य मानता
रहा हूँ और कई वर्षों तक लगातार उसके दर्शन को गया हूँ | साथ ही बजरंग बली हनुमान जी के दर्शनार्थ हर हफ्ते पूरी आस्था के साथ जाता हूँ
| फिर मुझे इस सामाज में बढ़ रही कुरूति का भागी
क्यों बना दिया | मैं आपसे कोई शिकायत नहीं
कर रहा क्योंकि मेरी धारणा है कि ईश्वर जो करता है अच्छे के लिए ही करता है | मैं तो केवल आप से यह जानना चाहता हूँ कि इसका
समाधान कैसे करूँ | इसी चितन में न जाने उसे
कब नींद आ गई और वह सो गया |
रात को सपने में मोहन को एक साया सा नजर आया | साए ने सांत्वना देते हुए कहा, “मैं तुम्हारे मन की घबराहट व् बेचैनी को जानता
हूँ, तुम खुद को कमजोर मत समझो, मैंने तुम्हारा हाथ पकड़ रखा है, मेरे सिवाय तुम्हारा हाथ
और कौन पकड़ेगा, जैसे आजतक किया है उसी
तरह निरंतर मेरा ध्यान करते रहो तुम्हारी चिंताएं मिट जाएँगी | उसने आगे बाताया कि मस्तानी ने अभी कोई गलत काम नहीं किया है और न ही करना चाहती | हालांकि वह देवेन्द्र को चाहती है परन्तु आपकी
रजामंदी के बगैर वह उससे शादी भी नहीं करेगी | वह देवेन्द्र के द्वारा उस पर की गयी सम्मोहन क्रिया के प्रभाव के कारण उसकी
बातों का प्रतिरोध नहीं कर पा रही है | वह हमेशा उससे यही कहता
है कि आप अडिग रहना और वह वही कर रही है |
मस्तानी पर भूत-प्रेत का साया वगैरह कुछ नहीं है अत: तांत्रिक आदि के चक्कर
में पड़ने से बचना | फिर छाया ने समाधान बताया
कि सम्मोहन की काट करने वाले भी बहुत मिल जाएंगे अत: उनकी शरण में जाओ | तुम्हारा कल्याण होगा | इतना कहकर साया अंतर्ध्यान हो गया |
रात के सपने से मोहन को बहुत शकुन मिला | उसने साए अनुसार कहे पंडित की
खोज शुरू कर दी | बहुत से लोगों से पूछा, इंटर नैट पर खोजा, कई स्थानों पर मिलने गया
और अन्त में एक निष्कर्ष पर पहूँचा | इस काम के लिए उसे पिलखुआ
का एक बुजूर्ग पंडित सबसे विश्वसनीय तथा उचित ज्ञानी जान पडा | क्योंकि पहली बार सामने बैठते ही
पंडित ने मोहन से सवाल किया, “लडकी की समस्या के लिए आए
हो ?”
“हाँ ! पंडित जी |”
“वह आने को राजी नहीं हुई
होगी ?”
“वह सभी की और आँखे तरेर कर देखती होगी ?”
“वह लड़के तथा उसके घर
वालों को इज्जत देने के लिए बोलती होगी ?”
“वह जासूसों की तरह घर का
हर हाल लड़के तक पहुंचा देती होगी |”
“लडकी तो साथ आई नहीं होगी ?” इत्यादि कई बातें पंडित जी ने बताई |
“आपकी सारी बातें सही हैं और पंडित जी वह नहीं आई |”
पंडित ने बड़े विशवास से कहा, “आएगी भी नहीं |”
“तब ?”
“अगली बार जब आओ तो लडकी
के वह कपड़े ले आना जो उसने नहाने के लिए उतारे हों |”
“अर्थात ?”
पंडित ने समझाया कि लडकी ने जो कपड़े पहले दिन
पहने हों और नहा कर बदले हों | पहले दिन पहने हुए कपड़े
बिना धोए यहाँ ले आना |
“ठीक है पंडित जी |”
मोहन ने उठने का उपक्रम किया ही था कि पंडित जी
ने एक बात और याद दिलाई कि वह केवल शुक्रवार के दिन दोपहर से पहले ही आए |