Tuesday, February 25, 2025

मस्तानी भाग-15

 

समाधान

मोहन के साथ पूजा (मोहन की पत्नी) की रातों की नींद हराम हो गयी थी | बच्चे भी समझ नहीं पा रहे थे कि इस का अंत कब तथा कैसे होगा | मोहन इस बारे में जितना चिंतन करता उतना ज्यादा फ़सा हुआ महसूस करता | समाधान मिल नहीं पा रहा था |

मोहन के सारे रिश्तेदार मस्तानी को समझाकर हार चुके थे |वह किसी की न सुनते हुए एक ही रट लगाए थी कि वह देवेन्द्र के बिना नहीं रह सकती |इसलिए मोहन अब अकेला पड गया था  परन्तु उसे विश्वास था कि वह अपनी लडकी को इस दलदल से निकालने में अवश्य सफल होगा |   

एक रात आँखे बंद किए इन्हीं विचारों में खोया वह सोचने लगा कि उससे भगवान् की आस्था में क्या कमी रह गयी कि मुरली वाले बाबा ने मुझे इतनी बड़ी दुविधा में डाल दिया | मैं तो बचपन से ही गोवर्धन को अपना पूज्य मानता रहा हूँ और कई वर्षों तक लगातार उसके दर्शन को गया हूँ | साथ ही बजरंग बली हनुमान जी के  दर्शनार्थ हर हफ्ते पूरी आस्था के साथ जाता हूँ | फिर मुझे इस सामाज में बढ़ रही कुरूति का भागी क्यों बना दिया | मैं आपसे कोई शिकायत नहीं कर रहा क्योंकि मेरी धारणा है कि ईश्वर जो करता है अच्छे के लिए ही करता है | मैं तो केवल आप से यह जानना चाहता हूँ कि इसका समाधान कैसे करूँ | इसी चितन में न जाने उसे कब नींद आ गई और वह सो गया |

रात को सपने में मोहन को एक साया सा नजर आया | साए ने सांत्वना देते हुए कहा, “मैं तुम्हारे मन की घबराहट व् बेचैनी को जानता हूँ, तुम खुद को कमजोर मत समझो, मैंने तुम्हारा हाथ पकड़ रखा है, मेरे सिवाय तुम्हारा हाथ और कौन पकड़ेगा, जैसे आजतक किया है उसी तरह निरंतर मेरा ध्यान करते रहो तुम्हारी चिंताएं मिट जाएँगी | उसने आगे बाताया कि मस्तानी ने अभी कोई गलत काम नहीं किया है और न ही करना चाहती | हालांकि वह देवेन्द्र को चाहती है परन्तु आपकी रजामंदी के बगैर वह उससे शादी भी नहीं करेगी | वह देवेन्द्र के द्वारा उस पर की गयी सम्मोहन क्रिया के प्रभाव के कारण उसकी बातों का प्रतिरोध नहीं कर पा रही है | वह हमेशा उससे यही कहता है कि आप अडिग रहना और वह वही कर रही है |

मस्तानी पर भूत-प्रेत का साया वगैरह कुछ नहीं है अत: तांत्रिक आदि के चक्कर में पड़ने से बचना | फिर छाया ने समाधान बताया कि सम्मोहन की काट करने वाले भी बहुत मिल जाएंगे अत: उनकी शरण में जाओ | तुम्हारा कल्याण होगा | इतना कहकर साया अंतर्ध्यान हो गया |

रात के सपने से मोहन को बहुत शकुन मिला | उसने साए अनुसार कहे पंडित की खोज शुरू कर दी | बहुत से लोगों से पूछा, इंटर नैट पर खोजा, कई स्थानों पर मिलने गया और अन्त में एक निष्कर्ष पर पहूँचा | इस काम के लिए उसे पिलखुआ का एक बुजूर्ग पंडित सबसे विश्वसनीय तथा उचित ज्ञानी जान पडा | क्योंकि पहली बार सामने बैठते ही पंडित ने मोहन से सवाल किया, “लडकी की समस्या के लिए आए हो ?”

हाँ ! पंडित जी |”

वह आने को राजी नहीं हुई होगी ?”

वह सभी की और आँखे तरेर कर देखती होगी ?”

वह लड़के तथा उसके घर वालों को इज्जत देने के लिए बोलती होगी ?”

वह जासूसों की तरह घर का हर हाल लड़के तक पहुंचा देती होगी |”

लडकी तो साथ आई नहीं होगी ?” इत्यादि कई बातें पंडित जी ने बताई |

आपकी सारी बातें सही हैं  और पंडित जी वह नहीं आई |”

पंडित ने बड़े विशवास से कहा, “आएगी भी नहीं |”

तब ?”

अगली बार जब आओ तो लडकी के वह कपड़े ले आना जो उसने नहाने के लिए उतारे हों |”

अर्थात ?”

पंडित ने समझाया कि लडकी ने जो कपड़े पहले दिन पहने हों और नहा कर बदले हों | पहले दिन पहने हुए कपड़े बिना धोए यहाँ ले आना |

ठीक है पंडित जी |”

मोहन ने उठने का उपक्रम किया ही था कि पंडित जी ने एक बात और याद दिलाई कि वह केवल शुक्रवार के दिन दोपहर से पहले ही आए |

Tuesday, February 18, 2025

मस्तानी भाग-14

 बढ़ती उलझन (2)

मोहन एक धार्मिक प्रवृति का व्यक्ति था | हर रविवार या मंगल वार को तो वह मंदिर अवश्य जाता था और बीच-बीच में जब भी मौक़ा मिलता वह दर्शन कर लेता था | उसकी ईश्वर में पक्की आस्था थी | उसे विशवास था कि ऊपरवाला समाज में उसकी जग हसाई कदापि नहीं होने देगा | फिर भी यह सुनिश्चित करने के लिए कि बात कहीं मुलाकातों से आगे तो नहीं बढ़ गयी, जब लाख समझाने के बावजूद मस्तानी देवेन्द्र के साथ ही शादी करने की जिद पर अड़ी रही, तो अपने दिल पर पत्थर रखकर मोहन ने एक अप्रत्यासित निर्णय ले लिया |

मोहन ने घर वालों से मस्तानी का सारा सामान अटैचियों में भर देने को कहा | सब अचरज में थे कि वे ऐसा क्यों कह रहे थे परन्तु उनके चेहरे पर दृड निश्चय भांप कर किसी में कुछ पूछने की हिम्मत न हुई | जब सारा सामान बन्ध गया तो मोहन ने अंतर्मन में रोते हुए मस्तानी से कहा, “आज तुम हमें आख़िरी बार देख लो | फिर हमारा तेरा रिश्ता खत्म | तुम्हारी जिद के सामने हार मानकर चलो मैं तुम्हें उसके घर पहुंचा आता हूँ |”

मोहन का निर्णय सुनकर मस्तानी रोकर बोली, “पापा जी मैं आप लोगों के बिना नहीं रह सकती | और फिर अभी ऐसा कुछ नहीं हुआ जिससे मैं वहां जाकर रहूँ |”

क्यों. क्या तुमने अभी शादी नहीं की ?”

नहीं पापा नहीं, मैं आपकी रजामंदी के बगैर ऐसा करूंगी भी नहीं |”

मस्तानी के वचन सुनकर मोहन को अपार शकून महसूस हुआ | फिर भी अपने को पक्का आश्वस्त करने हेतू वह बंधा हुआ सामान लेकर देवेन्द्र के घर पहुँच गया | और वहां जब मोहन ने कहा कि सामान उतार लो तो सभी अचरज में पड़ गए |

देवी :- कैसा सामान |

मोहन :- आपके लड़के की बहू का |

देवी:- हैरानी से, अभी वह हमारी बहू बनी कहाँ है |

इतना सुनना था कि मोहन वहां से एकदम वापिस चल दिया | अब वह आश्वस्त हो चुका था कि मेरी बेटी अभी तक किसी बंधन में नहीं बंधी है | इसके बाद मस्तानी की जिद को ख़त्म करवाने के लिए मोहन ने अपने नजदीकी रिश्तेदारों का, जो मस्तानी पर उसकी जिद छोड़ने के लिए प्रभाव डाल सकते थे, सहारा लिया |

अपने तजुर्बे के अनुसार रिश्तेदारों ने तरह-तरह के प्रशन किए मसलन:

तुम्हें कैसे पता है कि वह पंडित है ?

वह तुम्हें मजार तो ले गया परन्तु क्या कभी तुम दोनों साथ मंदिर भी गए ?

उसके दोस्तों की लिस्ट में अधिकतर मुसलिम नाम हैं यह क्यों ? इत्यादि |

जब भी कोई सवाल पूछता मस्तानी उसे घूरने के साथ चुप्पी साध लेती थी | कभी-कभी वह रोकर बीच-बीच में कहती कि उसे देवेन्द्र से ही शादी करनी है | सभी ने यही सारांश निकाल कर कि मस्तानी को समझाना व्यर्थ है अपनी असमर्थता में हाथ खड़े कर दिए |   

समय व्यतीत होने लगा | मस्तानी का बाहर जाना बंद सा हो गया | धीरे-धीरे लगा जैसे अपने परिवार वालों के प्रति उसका स्वाभाव कुछ नरमी पर आ रहा है | मोहन ने मस्तानी की रजामंदी से एक अच्छा सा रिश्ता ढूंढकर बात आगे बढाई | लडकी देखने का प्रोग्राम तय हो गया | दोनों तरफ के रिश्तेदार खुशनुमा माहौल में आपस में मिले | लड़के वालों ने मस्तानी को देखते ही अपनी सहमती जता दी कि उन्हें लड़की पसंद है फिर भी थोड़ी देर के लिए लड़के और लडकी को आपस में समझ लेने के लिए अकेला छोड़ दिया गया | वापिस आने पर अचानक लड़के वाले खड़े हुए और हाथ जोड़कर बोले, “अच्छा जी हम चलते हैं |”

सभी आश्चर्य चकित थे कि ऐसा क्या हो गया जो बात बनते-बनते बिगड़ गई | पूछने पर जवाब मिला कि हम तो मस्तानी को अपनाने की पूरी तैयारी के साथ आए थे परन्तु आपकी लडकी ही नहीं चाहती तो हम क्या कर सकते हैं |

साथ आए रिश्तेदारों ने जब कारण जानना चाहा तो सुनने को मिला कि आप खुद ही अपनी लडकी से जान लेना और विदा ले ली |  

पता चला कि मस्तानी ने लड़के से कहा था कि वह किसी और लड़के से प्रेम करती है और उसी से शादी करना चाहती है | उसने डर की वजह से यह बात अभी तक अपने घर नहीं बताई है अत: आप ही उनसे कह देना | घर के प्रत्येक सदस्य का पारा सातवें आसमान पर था परन्तु मस्तानी उस माहौल में शांत स्वभाव अपनी सफलता पर खुशनुमा नजर आ रही थी |