तीसरी मौत (क्रमशः)
चन्दगी को एक पुरानी
कहानी याद आ गयी | चार दोस्त थे | तीन तो उनमें एक से बढ़कर एक बुद्धिमान था परन्तु चौथा पूरा गंवार था | एक
बार वे कहीं घूमने जा रहे थे तो रास्ते में एक जंगल पड़ा | एक
स्थान पर उन्हें हड्डियों का एक ढेर दिखाई दिया | यह
देखकर एक बुद्धिमान ने पूछा, ”क्या कोइ बता सकता है कि ये किस जानवर
की हड्डियां हो सकती हैं ?”
सभी आश्चर्य चकित हो उसकी तरफ देखकर बोले, “यह
कैसे पता कर सकते हैं, यह मुमकिन नहीं है ?”
पहला गर्व से ऊंची गर्दन करके बोला, “अब
देखो मेरा कमाल |”
और उसने देखते ही देखते उन हड्डियों को जोड़ दिया | उनके
जुड़ने से एक शेर का कंकाल सामने खडा था |
इसे देखकर दूसरे बुद्धिमान को जोश आ गया और बोला, “अब
देखो मेरा भी करिश्मा, मैं इन हड्डियों के ऊपर असली मांस और खाल चढ़ा देता हूँ जिससे
यह असल शेर दिखाई देगा |”
और वास्तव में ही वह अपनी विद्या में सफल रहा |
अपने दोस्तों के कारनामें देखककर तीसरा बुद्धिमान चुप न बैठ
सका और बोला, “सामने खडा शेर लग ततो असल का शेर रहा है
परन्तु उसमें जान नहीं है | अब मैं उसमें जान डालकर आप सभी को चकोत कर दूंगा |”
अभी तक चौथा दोस्त जो चुपचाप अपने दोस्तों के कारनामें देख रहा
था अपने आख़िरी दोस्त की दलील सुनकर चुप न रह सका और चिल्लाया, “अरे
ऐसा मत करना अन्यथा हमारे में से कोई नहीं बचेगा |”
उसकी बात सुनकर उसके तीनों दोस्त, जो
हमेशा हर बात में उसका मजाक उड़ाया करते थे, व्यंग करते हुए एक साथ बोले, “अबे
डरपोक तू हमारे रहते डरता है | भाग यहाँ से और जोर से हँसने लगे |”
उस गवांर दोस्त को तो उनकी व्यंगात्मक बातें सुनने की आदत पड़
चुकी थी अत: इससे पहले कि शेर के पुतले में जान डालने से कोई विपदा आए वह
नजदीक के एक पेड़ पर चढ़ गया |
तीनों बुद्धिमान दोस्त अपनी शान दिखाने के चक्कर में शेर के
ज़िंदा होने पर अपनी सुरक्षा का इंतजाम करना भूल गए और काल का ग्रास बन गए |
अचानक चन्दगी को शाह नवाज की आवाज सुनाई दी, “थ्रेशर
चलाओ |”
चन्दगी ने बिना पीछे देखे अपने दाएं हाथ का अंगूठा ऊपर उठाकर
इशारा किया, “सब ठीक |”
शाह नवाज की आवाज सुनाई दी, “हाँ
चलाओ |”
चन्दगी ने बटन दबाया और थ्रेशर चालू हो गया परन्तु यह क्या कुछ
ही पलों में मशीन अपने आप बंद हो गई | चन्दगी ने पीछे मुड़कर देखा शाह नवाज वहां नहीं था | वह
झटपट थ्रेशर से नीचे उतरा और पीछे का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए | वहां
एक ह्रदय विदारक दर्शय था | शाह नवाज थ्रेशर की बेल्ट में फंसा था और उसके प्राण पखेरू उड़
चुके थे | थोड़ी देर पहले जो गबरू जवान उसके साथ था वह मृत्यु को प्राप्त
हो चुका था | वहां देखने वाला कोई नहीं था कि शाहनवाज की मौत का क्या कारण
रहा होगा | चन्दगी खुद भी एक अच्छी सेहत का मालिक था परन्तु इस हादसे को
देखकर वह भी अन्दर तक काँप गया | दूसरे इस बात का भी उसे डर सताने लगा कि न जाने उसके घर वाले
यह जानकर उसके साथ कैसा वर्ताव करेंगे | धार्मिक टकराव भी संभव था | खैर
जो घट चुका था उसे तो वापिस नहीं लाया जा सकता था यही सोचकर थोड़ा साहस जुटाकर
चन्दगी शाह नवाज के घर पहुंचा | उसके घर वालों ने चन्दगी का मुरझाया चेहरा भांपकर तथा शह नवाज
को उसके साथ न देखकर शंका से पूछा, “नवाज कहाँ रह गया ?”
चन्दगी की आवाज उसके गले में ही अटक गयी थी वह कुछ बोल न सका
और टुकुर टुकुर उसके घर वालों के चेहरे देखता खडा रहा |
उसकी ऐसी हालत देख किसी अनहोनी घटना होने की शंका से ग्रसित हो
शाह नवाज की माँ ने चन्दगी को झकझोरा, “बोलते क्यों नहीं क्या बात है ?”
अचानक चन्दगी को ख्याल आया कि एक दम असलियत बताने से कोहराम
तथा बगावत होने का अंदेशा है अत: कहा, “घर के लोग जल्दी से मेरे साथ चलो |”
चन्दगी ने अपने घर भी संदेशा पहुंचा दिया कि घर के सभी लोग
जल्दी से जल्दी उस जगह खेत में पहुँच जाएं जहां थ्रेशर लगा था | घटना
स्थल पर पहुंचकर सभी इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि शाह नवाज की इस दुखद घटना में
चन्दगी का कोई कसूर नहीं दिखाई देता | शाह नवाज की अपनी बेपरवाही के कारण उसका बांधा हुआ तेहमद
का कौना थ्रेशर की बेल्ट में आ गया होगा
और वह खुद भी उसमें खिंचता चता चला गया होगा | किसी
तरह मिल कर शाह नवाज के निष्प्राण शरीर को बाहर निकाला गया | उसे
उसके घर लाया गया | सर्व सम्मति से यह फैसला लिया गया कि इस घटना की सूचना पुलिस
को नहीं दी जाएगी | शाह नवाज के घर की औरतों ने भी बड़ों की बात मान कर चुप रहने का
कड़वा घूँट पी लिया |
चन्दगी और शाह नवाज के आपसी रिश्ते इतने मजबूत थे कि उनके
परिवार की छोटी से छोटी समस्या को भी आपस में साझा किया जाता था | दोनों
परिवार एक दूसरे के बुरे समय में साथ खड़े दिखाई देते थे | ऐसे
में एक व्यक्ति की पीड़ा दोनों परिवारों की पीड़ा बन जाती थी | वे
एक जुट होकर मुसीबत से लड़ते थे और उसे भगा कर ही दम लेते थे | रिश्ते
निभाना भी समझौतों का दूसरा नाम है | रिश्ते केवल खून के ही नहीं होते भावनात्मक भी होते हैं | कई
बार भावनात्मक रिश्ते अटूट बन जाते हैं क्योंकि वहां प्रेम, सामंजस्य, धैर्य, ईमानदारी
तथा एक दूसरे के प्रति सद्भावना दिलों में कूट –
कूट कर भरी होती है | इसी भावनात्मक रिश्तों के कारण आज दो धार्मिक विचारों वाले एक
जुट होकर खड़े थे |
अगली सुबह शाह नवाज का दाह संस्कार कर दिया गया और इस मौत के
कारण भी चन्दगी पर कोई आंच नहीं आई |
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