Tuesday, March 4, 2025

मस्तानी - 16

 

समाधान -2 (16)

पंडित जी के बताए अनुसार मोहन अपनी बेटी मस्तानी के बिना धोए कपड़े लेकर पिलखुआ पहुँच गया | पंडित जी ने कपड़े हाथ में लेते ही बताया कि लडकी वशीकरण से ग्रसित है | फिर थोड़ी देर सोचने के बाद कहा कि यह केवल वशीकरण ही नहीं बल्कि ‘लव जेहाद’ का मामला भी लगता है |

मोहन आश्चर्य से, “पंडित जी साफ़-साफ़ बताईये कि यह क्या है ?”

“देखो बेटा पहले तो इसमें सम्मोहन का प्रयोग किया गया है परन्तु दूसरी तरफ जिस प्रकार से इसको अमल में लाया गया है उससे लड़का मुस्लिम दिखाई पड रहा है अत: यह मामला सम्मोहन के साथ ‘लव जिहाद’ का भी है |”

पंडित जी की बात सुनकर मोहन एकदम विचलित जान पडा, “परन्तु पंडित जी वह तो अपने आप को पंडित बता रहा था |”

‘वह अपने को कुछ भी बताए पर मैंने तुम्हें हकीकत बयान कर दी है ‘

मोहन अपना माथा पकड़ कर बुदबुदाया, “हे भगवान् मैंने पंडित जानकर अगर अपने रिश्तेदारों के कहे अनुसार शादी के लिए अपने कदम बढ़ा दिए होते तो कितना अनर्थ हो जाता |”              

मोहन की नजरें आसमान की ओर उठी, दोनों हाथ जुड़े और मुंह से निकला कि भगवान् आपने मेरी लाज रख ली | हे परवरदिगार वास्तव में ही तू मेरा रखवाला है |

थोड़ी देर बाद पंडित जी ने 15 पुडिया मोहन को थमाकर उनको इस्तमाल करने की विधि समझाई, “रोजआना एक पुडिया लडकी को देनी है |”

“कैसे ?”

“चाय या पानी में तो दी नहीं जा सकती इसलिए आटे में गूँथकर उसकी रोटियाँ सेकना बेहतर होगा |”

“ठीक है पंडित जी |”

“एक बात और, प्रत्येक दिन एक पुडिया लडकी के पहले दिन पहने हुए कपड़ों में थोड़ी देर रख कर ही इस्तेमाल करना |”

“कितनी देर रखें ?”

“यही कोई पन्द्रह मिन्ट के लगभग |”

और हाँ अगर एक सप्ताह बाद आपको उसके आचरण में कोई सुधार महसूस होने लगे तो मुझे सूचित करना तथा पन्द्रह दिनों बाद एक बार आकर फिर दवाई ले जाना |     

पंडित जी की पुडिया ने एक सप्ताह में ही असर दिखाना शुरू कर दिया था | अब मस्तानी का उग्र रूप न रहकर पहले की तरह शांत दिखने लगा था | वह अपने भाई, बहन तथा माँ से शालीनता से बात करने लगी थी | जासूसी से घर के समाचार भेजने भी बंद कर दिए थे | लग रहा था जैसे सम्मोहन का असर कम होता जा रहा था और वह देवेन्द्र को भूलती जा रही थी |

अगली पन्द्रह दिन की दवाई देते हुए पंडित जी ने कहा कि अगर मस्तानी पढ़ रही है तो जब तक दवाई चल रही है उसे बाहर न भेजें | इसके बाद अगले एक महीने उस पर कड़ी निगरानी रखनी होगी | फिर वह सभी वशीकरण के बन्धनों से पूरी तरह मुक्त हो जाएगी और आप भी चिंताओं से पार पा लोगे |

ऐसा हुआ भी | घर का माहौल पहले जैसा खुशनुमा हो गया | थोड़े दिनों में ही ऐसा लगा जैसे इस घर में कोई समस्या आई ही नहीं थी | देवेन्द्र पूरी तरह मस्तानी के दिलो दिमाग से निकल गया था | अब सभी पुरानी व्यथा भरी बातों को पीछे छोड़ सभी अपने अपने काम में व्यस्त हो गए थे | 

 

 

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