शादी की बात
एक बार फिर घर में मस्तानी की शादी की चर्चाएँ
होने लगी | कई लड़के तो पहले से ही नजर कर रखे थे जिनमें
मदन ही पसंद आया था और उससे रिश्ता पक्का करने का उपक्रम भी किया गया था परन्तु उस
समय मस्तानी के ऊपर सम्मोहन के प्रभाव के कारण बात बन न सकी थी | इसलिए अब यह सोचना था कि
अबकी बार किस लड़के के घर वालों से बात की जाए |
अपना मन पसंद लड़का मिलना भी एक टेढ़ी खीर होती
है | मदन की तरह का लड़का कोई मिल नहीं रहा था या ये कहो कि वह
सबकी पहली पसंद था | पूजा भी इस हक़ में थी कि फिर दोबारा उसी के
माता-पिता से बात की जाए | दोबारा उसी जगह रिश्ते की बात चलाना, जहां लडकी कह चुकी थी कि
वह किसी और को चाहती है, बात चलाना इतना सहज तथा आसान नहीं था जितना
पूजा समझती थी |
बहुत गहन सोच विचार कर इस नतीजे पर पहुंचा गया
कि इस बार मदन के माता-पिता की बजाय पहले उसके चाचा से बात शुरू की जाए क्योंकि जब
पहले देखने दिखाने की बात हुई थी तो मदन के चाचा अर्जुन ने ही सब काम की बागडोर
संभाल रखी थी | अर्जुन एक पढा लिखा तथा समझदार आदमी था | महसूस किया गया था कि मदन
पर भी उसका बहुत प्रभाव था | यही नहीं पता चला था कि
मदन अपने चाचा की किसी बात का विरोध भी नहीं करता था | अर्जुन की खुद की लव
मैरीज थी तथा वह जीवन के उतार-चढ़ाव को भली भांती समझता था |
खाट्टू श्याम जी में अटूट आस्था रखने वाला मोहन
हिम्मत करके एक दिन अर्जुन के घर पहुँच गया | मोहन को देख अर्जुन ने
हैरानी से पूछा. “आप ?”
“हाँ जी |”
मोहन को अन्दर आने को कहकर चलते-चलते ही सवाल
किया, “कैसे आना हुआ ?”
थोड़ा झिझक कर परन्तु संयम रखते हुए, “रिश्ते के बारे में बात
करनी है |”
“किसके रिश्ते के बारे में |”
“अपनी लडकी के रिश्ते के बारे में |”
“अपनी छोटी लडकी के बारे में ?”
मोहन अपनी शर्मिन्दगी छिपाते हुए धीरे से बोला, “नहीं अपनी बड़ी लडकी के
लिए |”
अर्जुन :-किसके साथ ?
“मदन के साथ” कहकर मोहन ने अपनी नजरें अर्जुन
के चेहरे पर गडा दी |
अर्जुन आश्चर्य से उछल पडा, यह क्या कह रहे हो, यह कैसे संभव है |
मोहन ने अपना पक्ष रखा, “भाई साहब आस-पडौस में पति-पत्नी
की नौक-झोंक को देख-सुनकर मस्तानी के मन में शादी के नाम पर भय सा बैठ गया था | उसके चलते वह शादी के लिए
मना करती रहती थी | उस दिन भी सभी को देखकर वह डर गयी थी और बचने
के लिए उसने ऐसी बात कह दी थी |”
“परन्तु अब यकीन कैसे किया जाएगा ?”
अर्जुन की पत्नी एक स्वछंद विचारों वाली लडकी
थी | वह बैठी हुई दोनों की बातों को सुन रही थी | जब अर्जुन ने यकीन की बात
की तो वह बोल पडी, “आपको याद है न आपके चाचा की लडकी शादी कराने से
कितनी डर रही थी | जब लड़के वाले देखने आए थे तो उसने अपने को कमरे
में बंद कर लिया था | कितनी मुश्किलों से उसे राजी किया था |”
अर्जुन हथियार डालकर, “वह तो है परन्तु...........|”
“परन्तु क्या, मस्तानी की तरह बहुत सी
पढी लिखी लडकियां अपने भविष्य को लेकर इसी प्रकार भयभीत तथा आशंकित रहती हैं |”
अर्जुन ने अपना वाक्य पूरा किया, “परन्तु उसने तो कहा था कि
वह किसी और को चाहती है |”
“हो सकता है उसने सिर पर आई बला को टालने के
लिए ही ऐसा कहा हो ?”
अर्जुन की पत्नी के पक्ष लेने से मोहन को उसे
मनाने में अधिक प्रयास नहीं करना पडा | और अर्जुन ने अपने बड़े
भाई दिनेश के सामने मस्तानी के साथ मदन की शादी का प्रस्ताव रखने की कबूल ली |
मौक़ा पाकर एक दिन अर्जुन अपने भाई दिनेश के पास
पहुँच गया | वहां सभी बैठे थे | अच्छा अवसर देख अर्जुन
बोला, “भाई साहब मदन के लिए एक रिश्ता आया है |”
“कहाँ से |”
अर्जुन थोड़ा झिझकते हुए, “पुराना रिश्ता है |”
“पुराना ! कौन सा पुराना ?”
“उसी का जिसकी पहले देखा दिखाई हुई थी |”
“जिसने कहा था कि वह किसी दूसरे को पसंद करती
है ?”
“हाँ भाई साहब उसी की बात कर रहा हूँ |”
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